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ईरान में महंगाई और मुद्रा संकट के बीच नए प्रदर्शन, सरकार पर विदेश नीति को प्राथमिकता देने के आरोप

ईरान गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। रियाल की कीमत में तेज गिरावट और बढ़ती महंगाई के बीच 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन कई शहरों में फैलते गए।

ईरान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, जहां रियाल की कीमत में तेज गिरावट और ऊंची महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में देश के अलग-अलग हिस्सों में नए सिरे से विरोध प्रदर्शनों की लहर देखी गई।

ईरान में महंगाई और मुद्रा संकट के बीच नए प्रदर्शन, सरकार पर विदेश नीति को प्राथमिकता देने के आरोप
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रिपोर्ट के मुताबिक, 28 दिसंबर 2025 को तेहरान में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुए प्रदर्शन आगे चलकर और व्यापक हो गए। जैसे-जैसे छात्र समूहों और अन्य वर्गों की भागीदारी बढ़ी, प्रदर्शन कई स्थानों पर ज्यादा तेज दिखाई दिए।

प्रदर्शनकारियों की शिकायतों का केंद्र बढ़ती महंगाई, रोजगार और जीवन-यापन की लागत है। कई लोगों का कहना है कि घरेलू कल्याण और अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय सरकार विदेशों में सहयोगी समूहों को समर्थन देने जैसी नीतियों को प्राथमिकता देती रही है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनावों का असर लंबे समय से रहा है। जब मुद्रा कमजोर होती है, तो आयातित वस्तुएं महंगी होती हैं, ईंधन व खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ता है और आम परिवारों की क्रय-शक्ति घटती है। यही असंतोष अक्सर सड़कों पर उतरकर विरोध में बदल जाता है।

ऐसे आंदोलनों में सरकार आम तौर पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देकर सख्ती बढ़ाती है, जबकि प्रदर्शनकारी राजनीतिक जवाबदेही और आर्थिक राहत की मांग करते हैं। इन दोनों के बीच टकराव की स्थिति बने रहने पर अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर बाजार और निवेश भरोसे पर भी पड़ता है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार आर्थिक राहत, सब्सिडी, मुद्रा-नीति या अन्य कदमों से कितनी जल्दी दबाव घटा पाती है। यदि महंगाई और रियाल की गिरावट पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो जन-आक्रोश और व्यापक हो सकता है—और यह ईरान की घरेलू राजनीति तथा क्षेत्रीय समीकरणों, दोनों को प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. DW (Hindi)DW (Hindi)