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चीन की आबादी लगातार चौथे साल घटी: जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर, जनसांख्यिकीय दबाव बढ़ा

चीन में 2025 में जन्मदर ऐतिहासिक रूप से बहुत नीचे आ गई और आबादी चौथे साल भी घटी। सरकार के प्रोत्साहनों के बावजूद जन्म संख्या में गिरावट जारी है, जिससे अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर लंबी अवधि का दबाव बढ़ सकता है।

चीन की आबादी 2025 में लगातार चौथे वर्ष भी घट गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जन्मदर रिकॉर्ड स्तर तक गिर गई, जबकि मृत्यु दर जन्म दर से अधिक रही। इस गिरावट ने उस जनसांख्यिकीय चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है, जिसके चलते चीन में श्रमबल, खपत और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर आने वाले वर्षों में दबाव बढ़ने की आशंका जताई जाती रही है।

चीन की आबादी लगातार चौथे साल घटी: जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर, जनसांख्यिकीय दबाव बढ़ा
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आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल देश में शिशु जन्म की संख्या बहुत कम रही और प्रति 1,000 लोगों पर जन्म दर 1949 के बाद के सबसे निचले स्तर पर बताई गई। जन्मों में गिरावट के साथ-साथ मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक रहने से कुल आबादी में सालाना कमी दर्ज हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान केवल एक साल का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है।

चीन सरकार ने बीते वर्षों में परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए कई उपाय किए हैं—जैसे नकद सब्सिडी, कर-रियायतें और बच्चों की देखभाल से जुड़ी नीतिगत मदद। फिर भी, युवाओं में विवाह और बच्चे पैदा करने को लेकर झिझक बनी हुई है। बढ़ती जीवन-यापन लागत, आवास की महंगाई, शिक्षा खर्च और नौकरी की असुरक्षा जैसे कारणों को अक्सर बड़ी वजह माना जाता है।

नीतिगत बदलावों के बावजूद प्रजनन दर लंबे समय से प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है। इससे आबादी का औसत उम्र ढांचा तेजी से बढ़ती ‘एजिंग’ की ओर जा रहा है। अधिक बुजुर्ग आबादी का मतलब है स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन और सामाजिक देखभाल पर बढ़ता खर्च, जबकि कामकाजी उम्र के लोगों का अनुपात घटता जाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान लंबे समय तक जारी रहे तो आर्थिक विकास और उत्पादकता बनाए रखने के लिए चीन को अधिक व्यापक श्रम, आव्रजन या तकनीकी रणनीतियों पर निर्भर होना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बदलाव का महत्व है, क्योंकि चीन लंबे समय तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा, लेकिन 2023 में भारत उससे आगे निकल गया। जनसंख्या के घटने और उम्र बढ़ने की संयुक्त चुनौती के बीच चीन के लिए नीति-निर्माण का फोकस अब केवल जन्मदर बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकता; रोजगार, शहरीकरण, सामाजिक सुरक्षा और उत्पादकता सुधार भी समानांतर प्राथमिकताएं बन रही हैं।

आगे की तस्वीर इस पर भी निर्भर करेगी कि सरकार परिवारों पर लागत का बोझ घटाने के लिए शिक्षा, हाउसिंग और देखभाल सेवाओं में क्या दीर्घकालिक सुधार करती है। वहीं, समाज में करियर, विवाह और माता-पिता बनने की बदलती प्राथमिकताओं को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं होंगे; सांस्कृतिक और संस्थागत बदलाव भी उतने ही जरूरी होंगे।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. DWDW