ग्रीनलैंड पर ट्रंप की ‘कंट्रोल’ योजना से यूरोप के दक्षिणपंथी दलों में खटास, MAGA के पुराने साझेदार भी असहज
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षाओं ने यूरोप के कई दक्षिणपंथी दलों और MAGA के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ाया है। कई यूरोपीय नेताओं ने इसे संप्रभुता के लिए खतरा बताकर आलोचना की, जबकि कुछ पूर्वी यूरोपीय नेताओं ने अधिक संयमित प्रतिक्रिया दी।
क्यों बढ़ा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण/अधिग्रहण जैसी योजना ने यूरोप में कई राजनीतिक धड़ों को असहज कर दिया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुद्दा यूरोप के दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी दलों और ट्रंप के MAGA आंदोलन के बीच भी तनाव का कारण बन रहा है—जबकि इससे पहले आप्रवासन, राष्ट्रवाद और ‘एस्टैब्लिशमेंट’ विरोध जैसे मुद्दों पर इन खेमों में वैचारिक नजदीकियां दिखती थीं।

रिपोर्ट में बताया गया कि फ्रांस, जर्मनी और इटली के कई दक्षिणपंथी नेता ट्रंप के कदम को ‘संप्रभुता’ और ‘राष्ट्रीय हित’ के नजरिए से चुनौती की तरह देख रहे हैं। ब्रिटेन में भी लंबे समय से ट्रंप के करीबी माने जाने वाले कुछ नेताओं ने इसे ‘शत्रुतापूर्ण’ करार देकर आलोचना की।
यूरोपीय संसद और ‘सॉवरेन्टी’ की बहस
एपी के मुताबिक यूरोपीय संसद में हुई बहस के दौरान भी ट्रंप के दबाव और धमकियों को लेकर असहजता दिखाई दी। कई सांसदों ने इसे ‘दबाव बनाने’ और ‘संप्रभुता को चुनौती’ के तौर पर पेश किया। यह संकेत देता है कि ‘साझा विचारधारा’ के बावजूद विदेश नीति के मामलों में यूरोपीय राष्ट्रवादी दल भी अपने-अपने देश और क्षेत्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पूर्वी यूरोप का अलग रुख
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूरोप के पूर्वी हिस्से के कुछ नेता अपेक्षाकृत नरम/कूटनीतिक भाषा में प्रतिक्रिया देते दिखे। कुछ नेताओं ने इसे नाटो या द्विपक्षीय बातचीत के दायरे में सुलझाने की बात कही और व्यापक यूरोपीय मोर्चेबंदी से दूरी बनाए रखी।
इसका असर क्या हो सकता है
यह विवाद ट्रंप समर्थक अंतरराष्ट्रीय दक्षिणपंथी नेटवर्क में दरार का संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट में विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि यदि अमेरिकी नीति को यूरोपीय देशों की संप्रभुता के लिए खतरे के तौर पर देखा जाता रहा, तो यह विभाजन और गहरा हो सकता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह तनाव स्थायी ‘ब्रेक’ बनेगा या कुछ साझा घरेलू मुद्दों पर सहयोग के चलते फिर नजदीकियां लौटेंगी। लेकिन ग्रीनलैंड प्रकरण ने दिखा दिया है कि ‘राष्ट्रवाद’ के नाम पर बने गठबंधन में भी सीमाएं होती हैं—खासकर जब भू-राजनीति और क्षेत्रीय अधिकारों की बात आती है।