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ईयू-मर्कोसुर व्यापार समझौते को हरी झंडी, फ्रांस सहित यूरोप के किसान नाराज़

यूरोपीय संघ ने दक्षिण अमेरिकी समूह मर्कोसुर के साथ लंबे समय से अटके व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 में से अधिकांश देशों ने समर्थन किया, जबकि खासतौर पर किसान संगठनों और कुछ देशों में असंतोष दिख रहा है।

यूरोपीय संघ (EU) ने दक्षिण अमेरिकी देशों के समूह मर्कोसुर के साथ एक बड़े व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डील लगभग 25 वर्षों से चर्चा/अटकाव के दौर से गुजर रही थी और ब्रसेल्स में राजदूतों की बैठक के बाद EU के 27 देशों में से अधिकांश ने इसे समर्थन दिया। मर्कोसुर में अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे जैसे देश शामिल बताए गए हैं।

ईयू-मर्कोसुर व्यापार समझौते को हरी झंडी, फ्रांस सहित यूरोप के किसान नाराज़
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डील क्यों अहम मानी जा रही है

EU और मर्कोसुर के बीच यह समझौता बाजार पहुंच, आयात-निर्यात नियमों और व्यापारिक सहयोग को विस्तार देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। समर्थकों का तर्क है कि इससे दोनों पक्षों के बीच कारोबार आसान हो सकता है, कंपनियों को नए बाजार मिल सकते हैं और रणनीतिक स्तर पर साझेदारी मजबूत हो सकती है। कई यूरोपीय देशों के लिए यह भी एक संकेत है कि EU वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार नेटवर्क में अपनी स्थिति को पुनर्संतुलित करना चाहता है।

किसानों की नाराज़गी और विरोध का कारण

रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले के बाद खासतौर पर फ्रांस सहित यूरोप के कई हिस्सों में किसान नाराज़ हैं। किसान संगठनों की चिंता आम तौर पर इस बात को लेकर होती है कि सस्ते कृषि उत्पादों का आयात बढ़ने पर स्थानीय किसानों पर कीमतों का दबाव आ सकता है और प्रतिस्पर्धा असमान हो सकती है। साथ ही, खेती में मानकों, पर्यावरण नियमों और उत्पादन लागत में अंतर होने के चलते वे इसे अपने हितों के खिलाफ मानते हैं।

आगे की प्रक्रिया में क्या देखना होगा

EU के भीतर किसी भी बड़े व्यापार समझौते को अमल में लाने के लिए राजनीतिक सहमति, कानूनी प्रक्रियाएं और कई स्तरों पर समीक्षा अहम होती है। इसलिए आने वाले हफ्तों/महीनों में यह देखा जाएगा कि विरोध के बीच EU के भीतर कैसे सहमति बनाई जाती है, किन शर्तों/सेफगार्ड्स पर जोर दिया जाता है और क्या कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जोड़े जाते हैं।

कुल मिलाकर, EU-मर्कोसुर डील पर सहमति का संदेश यह है कि दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापारिक रिश्ते विस्तार की दिशा में जा रहे हैं, लेकिन यूरोप में किसानों का असंतोष इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी बना रहा है।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. DW HindiDW Hindi