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जेलेंस्की का दावा: रूस-यूक्रेन शांति समझौता ‘90% तैयार’, पुतिन के रुख पर भी चर्चा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने नए साल के मौके पर कहा कि रूस के साथ संभावित शांति समझौता लगभग 90% तैयार है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी रणनीति/जीत को लेकर अलग संकेत दिए हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर नए साल की शुरुआत में एक बड़ा दावा सामने आया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ शांति समझौता लगभग 90% तैयार हो चुका है और सिर्फ 10% हिस्से पर काम बाकी है। इस बयान ने युद्धविराम और बातचीत की संभावनाओं पर फिर से अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींच दिया है।

जेलेंस्की का दावा: रूस-यूक्रेन शांति समझौता ‘90% तैयार’, पुतिन के रुख पर भी चर्चा
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रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर यूक्रेन किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करेगा। आम तौर पर ऐसे ‘रेड-लाइन’ मुद्दों में सुरक्षा गारंटी, क्षेत्रीय अखंडता और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े बिंदु प्रमुख रहते हैं। हालांकि समझौते के मसौदे की सार्वजनिक जानकारी सीमित है, लेकिन बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच आखिरी दौर की बातचीत सबसे कठिन साबित हो सकती है।

इसी संदर्भ में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रुख का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि पुतिन ने अपनी स्थिति को लेकर आत्मविश्वास दिखाया, जिससे यह संदेश जाता है कि मास्को बातचीत में अपने हितों को प्राथमिकता देना चाहता है। जब किसी संघर्ष में दोनों पक्ष ‘जीत’ या ‘रणनीतिक बढ़त’ की भाषा बोलते हैं, तो समझौते की शर्तों पर सहमति बनाना अक्सर जटिल हो जाता है।

शांति समझौते की दिशा में 90% ‘तैयारी’ का दावा उम्मीद जगाता है, लेकिन असली कसौटी अंतिम 10% में होती है। आम तौर पर यही हिस्सा सबसे संवेदनशील होता है, क्योंकि इसमें सुरक्षा ढांचा, सीमा/क्षेत्र, कैदियों और प्रतिबंधों जैसी शर्तें आती हैं। बयान एक राजनीतिक संकेत भी हो सकता है—घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाने की कोशिश कि बातचीत का रास्ता खुला है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस दावे के बाद औपचारिक वार्ता तेज होती है या फिर दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तें कठोर बनाकर दबाव की राजनीति करते हैं। फिलहाल, यह बयान युद्ध के समाधान की दिशा में संभावनाओं को रेखांकित करता है, लेकिन अंतिम नतीजा जमीन पर हालात और कूटनीतिक सहमतियों पर निर्भर रहेगा।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. Navbharat TimesNavbharat Times