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UGC ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ विवाद: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले—‘भरोसा देता हूं, किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा’

UGC द्वारा लागू किए गए ‘Promoting Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026’ को लेकर उठे विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पहला बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया न्यायपालिका के दायरे में है और किसी के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।

क्या है विवाद: UGC के नए नियमों पर क्यों उठे सवाल

UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘Promoting Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026’ लागू किए। इसके बाद शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई। विरोध करने वालों का कहना है कि समानता समिति/इक्विटी मेकेनिज्म में सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के लिए अनिवार्य प्रतिनिधित्व स्पष्ट रूप से तय नहीं किया गया, जिससे नियमों की व्याख्या और लागू करने के तरीके को लेकर चिंताएं बढ़ीं।

UGC ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ विवाद: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले—‘भरोसा देता हूं, किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा’
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इसी पृष्ठभूमि में 27 जनवरी 2026 को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पहला औपचारिक बयान सामने आया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियमों का उद्देश्य ‘न्याय सुनिश्चित करना’ है, किसी का उत्पीड़न नहीं।

धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह भरोसा दिलाते हैं कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया न्यायपालिका के दायरे/देखरेख में है, और इस संदर्भ में सुरक्षा व निष्पक्षता को लेकर जो आशंकाएं उठ रही हैं, उन्हें ध्यान में रखा जाएगा।

विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रिया का माहौल

नए नियमों के खिलाफ छात्र संगठनों और अलग-अलग समूहों ने विरोध के संकेत दिए। कई जगहों पर UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन की बात सामने आई। मुद्दा शिक्षा-नीति, प्रतिनिधित्व और ‘इक्विटी’ की परिभाषा को लेकर केंद्र में आ गया है, इसलिए राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेज होने की संभावना है।

आगे की राह

अब आगे यह देखा जाएगा कि UGC नियमों के क्रियान्वयन (implementation) को लेकर क्या स्पष्टीकरण जारी करता है, और क्या शिक्षा मंत्रालय/UGC किसी संशोधन, FAQ या गाइडलाइन के जरिए भ्रम दूर करता है। विश्वविद्यालयों में इक्विटी समितियों के गठन, उनकी संरचना और शिकायत निवारण प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

विवाद के बीच शिक्षा मंत्री का बयान सरकार की तरफ से ‘आश्वासन’ की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन प्रदर्शन और बहस की तीव्रता के आधार पर अगले कुछ दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. AajTakAajTak