महाराष्ट्र में NEP लागू: कक्षा 1-5 के लिए हिंदी तीसरी भाषा अनिवार्य, अगले सत्र से शुरू
महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत मराठी और अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य ‘तीसरी भाषा’ बनाने का फैसला किया है। सरकार के मुताबिक, नया सिलेबस चरणबद्ध तरीके से लागू होगा और अगले शैक्षणिक सत्र से इसकी शुरुआत होगी।
महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भाषा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए मराठी और अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा बनाने का निर्णय लिया है। 27 जनवरी 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अगले शैक्षणिक वर्ष से प्रभावी होगा और चरणबद्ध तरीके से विभिन्न कक्षाओं में NEP-आधारित सिलेबस लागू किया जाएगा।

अभी क्या व्यवस्था थी और अब क्या बदलेगा
अब तक इन स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं में मुख्य रूप से मराठी और अंग्रेज़ी को अनिवार्य भाषाओं के रूप में पढ़ाया जाता था। नए फैसले के बाद हिंदी तीसरी भाषा के तौर पर कक्षा 1 से 5 तक अनिवार्य हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह नीति NEP के तीन-भाषा फॉर्मूला और भाषा-आधारित सीखने के उद्देश्यों के अनुरूप है।
चरणबद्ध लागू करने की समय-सीमा
सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, NEP के अनुरूप नया सिलेबस अलग-अलग कक्षाओं में अलग समय पर लागू होगा। इसका उद्देश्य यह बताया गया है कि स्कूल, शिक्षक और पाठ्यक्रम सामग्री समय रहते तैयार हो सकें। राज्य ने यह भी संकेत दिया है कि उच्च कक्षाओं (6 से 10) के लिए भाषा नीति राज्य पाठ्यक्रम के अनुरूप रहेगी।
शिक्षक, किताबें और कार्यान्वयन की चुनौती
नीति लागू होने के साथ सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती शिक्षक-उपलब्धता, पाठ्यपुस्तकों/डिजिटल सामग्री की समय पर आपूर्ति और स्कूलों में समय-सारिणी का पुनर्गठन मानी जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भाषा सीखने का लाभ तभी मिलेगा जब कक्षा-स्तर के अनुसार सामग्री, प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली मजबूत हो।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भाषा-बहस
भारत में भाषा नीति अक्सर राजनीतिक बहस का विषय रहती है। महाराष्ट्र के इस फैसले को भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है—जहां एक ओर बहुभाषी दक्षता को कौशल माना जाता है, वहीं दूसरी ओर अनिवार्यता के प्रश्न पर सामाजिक-राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी उभर सकती हैं। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि शिक्षक संगठनों, अभिभावकों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया क्या रहती है।