मुख्य सामग्री पर जाएं

LIVEखेल समाचार · स्रोत सहित

पिच
India
समय
मैदान से न्यूज़रूम तकखेल संसार

खेल की खबरें — तथ्यों के साथ

समाचार रिपोर्ट / स्रोत सहितराजनीति

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन—संविधान, एकता और लोकतांत्रिक आदर्शों पर जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जनवरी 2026 को देश को संबोधित करते हुए गणतंत्र दिवस को आत्ममंथन का अवसर बताया और न्याय, स्वतंत्रता, समता व बंधुता को भारत की दिशा तय करने वाले मूल्यों के रूप में रेखांकित किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने संविधान में निहित आदर्शों—न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता—को भारत की पहचान और मार्गदर्शक सिद्धांत बताते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अतीत, वर्तमान और भविष्य पर विचार का अवसर भी है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन—संविधान, एकता और लोकतांत्रिक आदर्शों पर जोर
संबंधित चित्र

भाषण में लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं की भूमिका का संदर्भ देते हुए राष्ट्रपति ने नागरिकों की साझा जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। उनके संदेश का केंद्रीय भाव यह रहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत के लोगों को गरिमा और अधिकारों के साथ जीवन जीने का ढांचा देता है, और इसे मजबूत बनाए रखना नागरिक जीवन का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता और ‘एकता में विविधता’ की भावना की चर्चा करते हुए भारत की लोकतांत्रिक यात्रा को साझा प्रयासों का परिणाम बताया। ऐसे संबोधनों में अक्सर प्रतीकात्मक संदेश प्रमुख होते हैं, लेकिन इस बार भी उन्होंने सामाजिक समरसता, राष्ट्र-निर्माण और नागरिक कर्तव्यों को एक साथ जोड़ते हुए यह संकेत दिया कि लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ केवल अधिकारों में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सहभागिता में भी है।

राजनीतिक दृष्टि से यह संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से संविधान-केंद्रित विमर्श को प्रमुखता देता है। यह संदेश सार्वजनिक जीवन में उस बहस को भी ऊर्जा देता है जिसमें संस्थाओं की स्वायत्तता, कानून के शासन और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा को लोकतंत्र की बुनियाद माना जाता है।

राष्ट्रपति के संबोधन के बाद गणतंत्र दिवस समारोहों में देशभर में विभिन्न कार्यक्रम और परेड आयोजित हुए/हो रहे हैं, और इस अवसर पर दिया गया संदेश सरकार, विपक्ष, संस्थाओं और नागरिक समाज—सबके लिए एक साझा संदर्भ बिंदु बन जाता है। आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि नीति और सार्वजनिक बहस में संविधान-केंद्रित प्राथमिकताएं कैसे परिलक्षित होती हैं।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. President of IndiaPresident of India