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गणतंत्र दिवस 2026: रूस, अमेरिका, चीन, जापान सहित कई देशों ने भारत को दी शुभकामनाएं; रिश्तों पर भी दिखा कूटनीतिक संदेश

गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत को कई देशों से शुभकामनाएं मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार चीन के शी जिनपिंग ने भारत के साथ रिश्तों का उल्लेख किया, जबकि अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ऐतिहासिक बंधन’ की बात कही। रूसी राजनयिकों ने कई भारतीय भाषाओं में संदेश दिए।

शुभकामनाओं में झलका कूटनीतिक संकेत

26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दुनिया के कई देशों से बधाई संदेश सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक रूस, अमेरिका, चीन, जापान, ईरान और बांग्लादेश सहित कई देशों ने भारत को शुभकामनाएं दीं। ऐसे संदेश सामान्य तौर पर औपचारिक होते हैं, लेकिन अक्सर इनमें रिश्तों की दिशा और प्राथमिकताओं की झलक भी मिलती है।

गणतंत्र दिवस 2026: रूस, अमेरिका, चीन, जापान सहित कई देशों ने भारत को दी शुभकामनाएं; रिश्तों पर भी दिखा कूटनीतिक संदेश
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रिपोर्ट में बताया गया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को ‘अच्छा मित्र और साझेदार’ जैसे शब्दों के साथ संबोधित करते हुए संबंधों की चर्चा की। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच ‘ऐतिहासिक बंधन’ की बात कही।

रूस का बहुभाषी संदेश

रिपोर्ट के अनुसार रूसी राजनयिकों ने भारत को कई भारतीय भाषाओं में शुभकामनाएं दीं। यह तरीका सांस्कृतिक जुड़ाव और सार्वजनिक कूटनीति (public diplomacy) का हिस्सा माना जाता है, जिसमें किसी देश की जनता तक अपनापन और सम्मान का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

समारोह और अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी

इसी दिन नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति और संदेश चर्चा में रहे। रिपोर्ट में परेड से जुड़ी तस्वीरों/उल्लेखों में दिखाया गया कि उच्च-स्तरीय विदेशी मेहमानों की मौजूदगी के बीच भारत ने अपना सैन्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन प्रस्तुत किया।

विशेषज्ञों के मुताबिक शुभकामना संदेशों को पूरी तरह से नीतिगत घोषणा नहीं माना जा सकता, लेकिन जब इन्हें व्यापक घटनाक्रम—जैसे शिखर वार्ताएं, व्यापार वार्ता, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय तनाव—के संदर्भ में देखा जाता है, तो ये देशों की प्राथमिकताओं और संवाद की भाषा का संकेत दे सकते हैं।

कुल मिलाकर, 26 जनवरी 2026 को भारत के गणतंत्र दिवस पर दुनिया के कई हिस्सों से आई शुभकामनाओं ने यह दिखाया कि भारत का संवैधानिक पर्व सिर्फ घरेलू उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर भी है जहां अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की गर्मजोशी, औपचारिकता और प्रतिस्पर्धा—तीनों की झलक दिखाई देती है।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. Hindustan TimesHindustan Times