वसुंधरा राजे का बयान: ‘राजनीति में महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है’
जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि राजनीति में जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों से कई गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने शिक्षा को महिलाओं की ताकत बताया और कहा कि महिला साक्षरता व भागीदारी में सुधार के बावजूद प्रतिनिधित्व अभी भी पर्याप्त नहीं है।
जयपुर: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और चुनौतियों पर खुलकर बात की। 25 जनवरी 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि राजनीति में जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

राजे ने कहा कि समय के साथ महिला साक्षरता और राजनीतिक भागीदारी में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन प्रतिनिधित्व अब भी उस स्तर पर नहीं पहुंच पाया है, जैसा होना चाहिए। उनके अनुसार, महिलाओं की भूमिका केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में बराबरी के साथ मौजूद रहना जरूरी है।
उन्होंने शिक्षा को महिलाओं की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताया। राजे का तर्क था कि शिक्षा महिलाओं को आत्मविश्वास देती है, समाज में उनकी आवाज मजबूत करती है और उन्हें अवसरों तक पहुंच दिलाती है। इस संदर्भ में उन्होंने महिला नेतृत्व के लिए आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण और मंच तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
राजनीति में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं पर बात करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि सामाजिक अपेक्षाएं, परिवार और सार्वजनिक जीवन के बीच संतुलन, तथा संगठनात्मक ढांचों में अवसरों की कमी जैसी बातें महिलाओं के लिए चुनौती बनती हैं। ऐसे में ‘अधिक मेहनत’ का दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
राजे ने यह भी कहा कि प्रतिनिधित्व पुरुषों के बराबर होना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब राजनीतिक संस्थानों में समाज के सभी वर्गों की वास्तविक हिस्सेदारी दिखे, और महिलाओं को भी समान अवसर मिले।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में विभिन्न स्तरों पर महिला प्रतिनिधित्व, नेतृत्व और समान अवसरों पर बहस तेज रहती है। राजे के वक्तव्य ने राजस्थान सहित राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर चर्चा को एक बार फिर सामने ला दिया।