WHO ने ‘कुष्ठ-मुक्त दुनिया’ की प्रतिबद्धता दोहराई, वर्ल्ड लेप्रोसी डे (25 जनवरी 2026) से पहले उपचार और स्टिग्मा पर जोर
21 जनवरी 2026 की WHO रिलीज के मुताबिक कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) का इलाज संभव है, लेकिन सामाजिक कलंक बड़ी चुनौती बना हुआ है। WHO और Novartis ने 2026-2030 के लिए साझेदारी विस्तार किया, ताकि MDT और रोकथाम से जुड़े उपायों की आपूर्ति जारी रहे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 21 जनवरी 2026 को जारी एक न्यूज़ रिलीज में कुष्ठ-मुक्त दुनिया की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। WHO के मुताबिक वर्ल्ड लेप्रोसी डे 25 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है और इस अवसर पर संगठन ने यह संदेश रेखांकित किया कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, लेकिन स्टिग्मा और सामाजिक बहिष्कार आज भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

WHO के अनुसार, कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है जो बैक्टीरिया (Mycobacterium leprae) के कारण होती है और यह मुख्य रूप से त्वचा तथा परिधीय नसों (peripheral nerves) को प्रभावित करती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो बीमारी धीरे-धीरे स्थायी विकलांगता की वजह बन सकती है। यही कारण है कि शुरुआती पहचान, त्वरित उपचार और समुदाय स्तर पर जागरूकता को रणनीति का केंद्र माना जाता है।
रिलीज में कहा गया है कि मल्टीड्रग थैरेपी (MDT) के जरिए कुष्ठ रोग को ठीक किया जा सकता है। WHO का जोर इस बात पर है कि उपचार तक पहुंच सुनिश्चित होने से विकलांगता रोकी जा सकती है, और प्रभावित लोगों को कामकाज व सामान्य जीवन जारी रखने में मदद मिलती है। लेकिन बीमारी के साथ जुड़ा सामाजिक कलंक कई बार इलाज पूरा होने के बाद भी लोगों का पीछा नहीं छोड़ता।
WHO के मुताबिक 2024 में 188 देशों/क्षेत्रों/टेरिटरीज़ ने डेटा जमा किया, जिनमें 55 ने शून्य केस रिपोर्ट किए। फिर भी उसी वर्ष विश्व स्तर पर 1,72,717 नए केस WHO को रिपोर्ट हुए। यह आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन बीमारी का बोझ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
साझेदारी के मोर्चे पर, WHO ने बताया कि Novartis के साथ सहयोग 2000 से चल रहा है, जिसके तहत MDT और clofazimine दुनिया भर में मुफ्त उपलब्ध कराई जाती रही है। 25 वर्षों की साझेदारी के अवसर पर WHO और Novartis ने 2026-2030 के लिए एक समझौता (MoU) बढ़ाया है, जिसमें MDT की निरंतर आपूर्ति के साथ-साथ SDR (single dose rifampicin) जैसी पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफाइलैक्सिस (PEP) के लिए खरीद और वितरण फंडिंग का भी उल्लेख है।
WHO ने यह भी रेखांकित किया कि आगे की प्रगति के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता, समुदाय की भागीदारी और लगातार सहयोग जरूरी है। इस साल की थीम—‘Leprosy is curable, the real challenge is stigma’—इसी दिशा में एक सार्वजनिक संदेश है, ताकि बीमारी के बारे में गलतफहमियां कम हों और प्रभावित लोगों के प्रति भेदभाव घटे।