ICMR रिपोर्ट: देश में बढ़ रहे संक्रामक रोगों का संकेत, सर्विलांस और जांच क्षमता पर जोर
ICMR से जुड़ी रिपोर्ट के आधार पर NDTV हेल्थ में कहा गया कि देश में संक्रामक रोगों की पहचान और निगरानी में कई रोग-समूहों की जांच हुई। रिपोर्ट में मम्प्स, खसरा, रूबेला, डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य संक्रमणों के उदाहरण दिए गए।
देश में संक्रामक रोगों को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंताएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। NDTV हेल्थ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ICMR से जुड़ी जानकारी में अलग-अलग अवधियों में बड़ी संख्या में रोग-समूहों (disease groups) की जांच का उल्लेख किया गया है, जिनमें कई वायरल और मच्छर-जनित संक्रमणों की पहचान हुई।

रिपोर्ट में बताया गया कि एक अवधि में कुल 191 रोग समूहों की जांच की गई और इसमें मम्प्स, खसरा, रूबेला, डेंगू, चिकनगुनिया, रोटावायरस, नोरोवायरस, वैरिसेला जोस्टर वायरस, एपस्टीन-बार वायरस और एस्ट्रोवायरस जैसे संक्रमणों की पहचान की बात कही गई। यह सूची बताती है कि संक्रमणों का दायरा व्यापक है और निगरानी (surveillance) का मजबूत होना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य अवधि (जनवरी से मार्च 2025) में 389 रोग समूहों की जांच हुई थी और इसमें हेपेटाइटिस, इन्फ्लूएंजा, लेप्टोस्पाइरा और यौन संचारित संक्रमणों (STIs) जैसे रोग भी सामने आए। ऐसे डेटा का उद्देश्य यह समझना होता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कौन-से संक्रमण अधिक सक्रिय हैं और किन जगहों पर संसाधन बढ़ाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य नीति के नजरिये से, इस तरह के निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के तीन अहम हिस्सों को मजबूत करने की तरफ संकेत करते हैं—(1) समय पर जांच और लैब नेटवर्क, (2) डेटा रिपोर्टिंग और रियल-टाइम निगरानी, और (3) रोकथाम के लिए समुदाय स्तर पर जागरूकता।
विशेषज्ञ अक्सर यह भी बताते हैं कि संक्रमणों का फैलाव मौसम, भीड़, यात्रा, जल-सफाई और मच्छर नियंत्रण जैसे कारकों से प्रभावित होता है। इसलिए केवल इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम—जैसे वैक्सीनेशन, स्वच्छता, और वेक्टर कंट्रोल—की भूमिका निर्णायक रहती है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का सार यही है कि संक्रमणों की पहचान और निगरानी के लिए बड़े पैमाने पर जांच और सर्विलांस जारी रखना जरूरी है, ताकि समय रहते चेतावनी मिल सके और स्वास्थ्य सेवाएं दबाव में आने से पहले तैयार हो सकें।