पद्मश्री सम्मान: भारत का पहला ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ शुरू करने वाली डॉ. अरमिडा फर्नांडिस को सम्मान
Padma Awards 2026 में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरमिडा फर्नांडिस को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने नवजातों के लिए ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार से जुड़ी पहलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Padma Awards 2026 के तहत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरमिडा फर्नांडिस को पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की खबर 25 जनवरी 2026 को सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. फर्नांडिस का योगदान केवल चिकित्सा सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और नवजात देखभाल के लिए ऐसी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को आगे बढ़ाया, जिनका असर खास तौर पर कमजोर और कम आय वाले शहरी समुदायों पर पड़ा।

‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है
नवजात शिशुओं, विशेषकर समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए मां के दूध को सर्वोत्तम पोषण माना जाता है। लेकिन कई बार मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता या चिकित्सकीय कारणों से स्तनपान संभव नहीं होता। ऐसे समय में ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ का मॉडल डोनर मिल्क को सुरक्षित रूप से संग्रहित और जरूरतमंद शिशुओं तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाता है, जिससे संक्रमण और कुपोषण का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में डॉ. फर्नांडिस के काम का विवरण
रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. अरमिडा फर्नांडिस ने सायन अस्पताल में भारत और एशिया के पहले ह्यूमन मिल्क बैंक से जुड़े प्रयासों में भूमिका निभाई और नवजातों की देखभाल, NICU सपोर्ट तथा स्तनपान को बढ़ावा देने पर काम किया। उन्होंने 1999 में SNEHA नामक संस्था शुरू की, जो मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, पोषण, किशोर स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
स्वास्थ्य प्रणाली के नजरिए से व्यापक असर
डॉ. फर्नांडिस को मिला सम्मान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह नवजात स्वास्थ्य, स्तनपान समर्थन और सार्वजनिक स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। ‘मिल्क बैंकिंग’ जैसे मॉडल केवल एक मेडिकल सुविधा नहीं, बल्कि अस्पताल-स्तर पर गुणवत्ता, प्रशिक्षण, और जागरूकता के एक पूरे सिस्टम की मांग करते हैं।
सार यह है कि 25 जनवरी 2026 को आई इस खबर ने एक बार फिर ध्यान दिलाया कि नवजातों की जीवन-रक्षा में पोषण, स्तनपान समर्थन और संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका निर्णायक होती है—और इन क्षेत्रों में निरंतर काम करने वाले लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।