जनवरी में ‘टीकाकरण उत्सव’: बुलंदशहर में 100% इम्युनाइजेशन लक्ष्य के लिए स्वास्थ्य विभाग की नई रणनीति
बुलंदशहर से आई रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनवरी माह को भी ‘टीकाकरण उत्सव’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। पहले दिसंबर में अभियान चला था, लेकिन लक्ष्य का करीब 62% ही पूरा हो सका। अब अधिकारियों ने प्रगति समीक्षा के साथ फील्ड स्तर पर गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनवरी महीने को भी ‘टीकाकरण उत्सव’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले दिसंबर को भी टीकाकरण उत्सव के रूप में मनाया गया था, लेकिन उस अवधि में लक्ष्य का लगभग 62 प्रतिशत ही पूरा हो सका। अब लक्ष्य शत-प्रतिशत टीकाकरण (100% immunization) प्राप्त करने का है, जिसके लिए विभाग ने अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

खबर में बताया गया है कि जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने विभिन्न स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ प्रगति की समीक्षा की और शत-प्रतिशत टीकाकरण करने के निर्देश दिए। ऐसे अभियानों में आम तौर पर मुख्य चुनौती ‘ड्रॉपआउट’ (जिन बच्चों/लाभार्थियों की कुछ खुराक छूट जाती है), माइग्रेशन, जागरूकता की कमी, और कुछ क्षेत्रों में पहुंच की समस्या होती है। इसलिए समीक्षा के बाद फील्ड-टीमों को माइक्रोप्लानिंग और ट्रैकिंग मजबूत करने की जरूरत होती है।
टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए अभियान-आधारित रणनीति में अक्सर घर-घर संपर्क, सूची अपडेट, और छूटे लाभार्थियों की पहचान (line listing) जैसे कदम शामिल होते हैं। साथ ही, स्कूल/आंगनवाड़ी नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर जन-जागरूकता भी अहम भूमिका निभाती है।
लोगों के लिए जरूरी बातें
- अपने क्षेत्र के टीकाकरण दिवस/कैंप की जानकारी आशा/आंगनवाड़ी/स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से लें।
- टीकाकरण कार्ड/रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और अगली खुराक की तारीख नोट करें।
- यदि किसी कारण से खुराक छूट गई हो, तो नजदीकी केंद्र पर जाकर कैच-अप टीकाकरण के बारे में पूछें।
- टीकाकरण के बाद सामान्य लक्षण (हल्का बुखार/दर्द) पर स्वास्थ्य कर्मियों की सलाह का पालन करें।
कुल मिलाकर, ‘टीकाकरण उत्सव’ जैसे अभियान का लक्ष्य कवरेज गैप को तेजी से कम करना और ऐसे परिवारों तक पहुंचना है जो नियमित सेवाओं से किसी कारण जुड़ नहीं पाते। विभाग की अगली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पहचान, फॉलो-अप और जागरूकता—तीनों कितनी प्रभावी बनती हैं।