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गणतंत्र दिवस पर दिल्ली हाई अलर्ट: AI-सहायता से निगरानी, 30,000+ कर्मी और 3,000+ CCTV कैमरों की तैनाती

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह के लिए दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 30 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और 3,000 से ज्यादा CCTV कैमरों के साथ AI की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक के सहारे और सख्त किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया और बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी को प्रमुख भूमिका दी गई, ताकि भीड़-प्रबंधन से लेकर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तक की प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक हो सके।

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली हाई अलर्ट: AI-सहायता से निगरानी, 30,000+ कर्मी और 3,000+ CCTV कैमरों की तैनाती
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30,000 से अधिक कर्मियों की तैनाती

रिपोर्ट में बताया गया कि गणतंत्र दिवस के मद्देनज़र 30,000 से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई। इतनी बड़ी तैनाती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परेड रूट, प्रमुख चौराहों, सीमावर्ती प्रवेश बिंदुओं और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में किसी भी स्थिति पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके।

AI और CCTV से ‘हाइटेक’ निगरानी

खबर के मुताबिक, 3,000 से अधिक CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है और AI की मदद से निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया गया है। इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि कैमरा-फीड पर संदिग्ध मूवमेंट, असामान्य भीड़-एकत्रीकरण, या प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठ जैसी घटनाओं की पहचान तेजी से हो सके।

ग्राउंड सिक्योरिटी: स्नाइपर टीम और संवेदनशील प्वाइंट

रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि प्रमुख स्थानों पर विशेष टीमों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। परेड जैसे बड़े आयोजन में तकनीक और मैनपावर दोनों का संयुक्त मॉडल अपनाना सुरक्षा एजेंसियों की मानक रणनीति माना जाता है।

क्यों अहम है यह टेक-ड्रिवन मॉडल

हर साल 26 जनवरी के आसपास सुरक्षा की चुनौती सिर्फ कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रहती; शहर की आवाजाही, ट्रैफिक, वीआईपी मूवमेंट और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। AI-सहायता वाली निगरानी व्यवस्था इसी वजह से केंद्रीय भूमिका में आई है—यह बड़े पैमाने पर डेटा/वीडियो स्ट्रीम को जल्दी ‘ट्रायेज’ करने और ऑपरेशनल टीमों तक अलर्ट पहुंचाने में मदद करती है।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. Navbharat TimesNavbharat Times