गूगल ने यूनिवर्सल कॉमर्स प्रोटोकॉल (UCP) लॉन्च किया, एआई मोड और जेमिनी ऐप में सीधे खरीदारी/चेकआउट की दिशा में कदम
12 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने Universal Commerce Protocol (UCP) नाम का एक ओपन सिस्टम शुरू किया है, जो एआई सिस्टम, रिटेलर्स और पेमेंट प्लेटफॉर्म को शॉपिंग प्रोसेस में साथ काम करने में मदद करेगा।
गूगल ने ऑनलाइन शॉपिंग के लिए नए एआई टूल्स की घोषणा की है, जिनमें Universal Commerce Protocol (UCP) भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक ओपन सिस्टम है जिसका मकसद एआई सिस्टम, रिटेलर्स और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को खरीदारी की पूरी प्रक्रिया में बेहतर तरीके से एक-दूसरे के साथ काम करने लायक बनाना है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब सर्च और चैट—दोनों में ‘एजेंटिक’ शॉपिंग अनुभव तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, UCP आने वाले समय में एक नए चेकआउट फीचर को पावर करेगा, जो अमेरिका में योग्य (eligible) गूगल प्रोडक्ट लिस्टिंग्स पर ‘AI Mode in Search’ और Gemini ऐप के भीतर उपलब्ध होगा। यानी यूजर जब किसी प्रोडक्ट पर रिसर्च कर रहा होगा, उसी दौरान खरीदारी का फैसला लेने पर उसे बाहर किसी अन्य साइट पर जाए बिना चेकआउट का रास्ता मिल सकता है।
इस फ्रेमवर्क को विकसित करने में गूगल ने कई बड़े कॉमर्स पार्टनर्स के साथ काम किया है। रिपोर्ट में Shopify, Etsy, Wayfair, Target और Walmart जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। ऐसे साझेदारों के जुड़ने से यह संकेत मिलता है कि गूगल केवल टेक डेमो नहीं, बल्कि बड़े रिटेल इकोसिस्टम के साथ मिलकर व्यावहारिक स्तर पर एक साझा प्रोटोकॉल बनाना चाहता है।
पेमेंट के लिहाज से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिस्टम Google Pay के जरिए खरीदारी को सक्षम करेगा और आगे चलकर PayPal को भी सपोर्ट करने की बात कही गई है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो यह ई-कॉमर्स के ‘डिस्कवरी टू पर्चेज’ सफर को छोटा कर सकता है, जिससे रिटेलर्स के लिए कन्वर्जन बढ़ने और यूजर्स के लिए खरीदारी आसान होने की संभावना बनती है।
गूगल के अन्य ऐलानों में ‘Business Agent’ का जिक्र भी है, जिसका उपयोग सर्च चैट्स में रिटेलर्स के साथ बातचीत के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा Merchant Centre में नए डेटा फील्ड्स और ‘Direct Offers’ जैसी पहल का उल्लेख है, जिसमें AI Mode के भीतर डिस्काउंट ऑफर्स दिखाए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, UCP और उससे जुड़े फीचर्स इस दिशा में इशारा करते हैं कि आने वाले महीनों में सर्च प्लेटफॉर्म्स ‘खोज’ के साथ-साथ ‘खरीद’ के भी प्रमुख गेटवे बनना चाहते हैं। हालांकि यूजर प्राइवेसी, पेमेंट सुरक्षा, रिटेलर इंटीग्रेशन और प्रतिस्पर्धा जैसे सवालों पर भी इस बदलाव के साथ ध्यान बढ़ना तय है।