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मोबाइल रिचार्ज महंगा होने की आशंका: रिपोर्ट में कहा गया—जून 2026 तक टैरिफ 15% बढ़ सकता है

एक रिपोर्ट के मुताबिक जियो, एयरटेल और वीआई जैसे ऑपरेटर जून 2026 तक रिचार्ज प्लान में 15% तक बढ़ोतरी कर सकते हैं। 5G नेटवर्क लागत और कम ARPU जैसी वजहों का हवाला दिया गया है।

भारत में मोबाइल सेवाओं का खर्च बढ़ने की आशंका फिर चर्चा में है। एक रिपोर्ट के अनुसार जियो, एयरटेल और वीआई जैसी टेलीकॉम कंपनियां अपने रिचार्ज प्लान में 15% तक बढ़ोतरी कर सकती हैं और यह बढ़ोतरी जून 2026 तक देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में दावा है कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच यूजर्स की नाराजगी भी सामने आ रही है।

मोबाइल रिचार्ज महंगा होने की आशंका: रिपोर्ट में कहा गया—जून 2026 तक टैरिफ 15% बढ़ सकता है
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रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियां 5G नेटवर्क से जुड़ी लागत और प्रति यूजर औसत कमाई (ARPU) को एक बड़ी वजह मानती हैं। 5G इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, स्पेक्ट्रम, नेटवर्क अपग्रेड और ऑपरेशन खर्च—ये सब मिलकर कंपनियों पर दबाव बढ़ाते हैं। ऐसे में टैरिफ बढ़ाने का तर्क यह दिया जाता है कि बिजनेस को टिकाऊ बनाने के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी है।

दूसरी तरफ, उपभोक्ताओं के नजरिए से समस्या यह है कि मोबाइल डेटा और कॉलिंग अब ‘जरूरत’ बन चुके हैं। पढ़ाई, नौकरी, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाएं और मनोरंजन—सब कुछ मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर है। ऐसे में 15% की संभावित बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है, खासकर उन यूजर्स पर जो पहले से कम कीमत वाले प्लान या प्रीपेड रिचार्ज का इस्तेमाल करते हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सेवाओं की गुणवत्ता और कीमतों के संबंध पर सवाल उठाए। लोगों की शिकायत यह रहती है कि नेटवर्क, कॉल ड्रॉप या डेटा स्पीड जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, लेकिन कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। इस तरह की प्रतिक्रिया आमतौर पर तब बढ़ती है जब बढ़ोतरी जल्दी-जल्दी होती है या विकल्प सीमित नजर आते हैं।

यदि टैरिफ बढ़ोतरी होती है, तो नियामक स्तर पर भी चर्चा तेज हो सकती है कि उपभोक्ता हित और उद्योग के वित्तीय स्वास्थ्य के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल, रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि टेलीकॉम कंपनियों की ओर से कीमतें बढ़ने को लेकर औपचारिक पुष्टि नहीं दी गई है, लेकिन संकेतों के आधार पर बाजार में इसे संभावित कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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स्रोत

  1. Navbharat TimesNavbharat Times