2026 वर्ल्ड कप के बहिष्कार पर जर्मन एफए का रुख: ‘अभी यह बहस गलत समय पर’
अमेरिका में होने वाले 2026 फुटबॉल विश्व कप के बहिष्कार की मांगों के बीच जर्मन फुटबॉल महासंघ के प्रमुख ने कहा कि इस वक्त बहिष्कार की बहस ‘पूरी तरह भटकी हुई’ है। जर्मन फुटबॉल लीग के प्रमुख और शीर्ष क्लब अधिकारियों ने भी इसी तरह का रुख दिखाया।
अमेरिका (और कुछ मैच कनाडा व मेक्सिको) में होने वाले 2026 फुटबॉल विश्व कप को लेकर यूरोप में बहिष्कार की मांगें उठने लगी हैं। इसी संदर्भ में जर्मन फुटबॉल महासंघ (DFB) ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जर्मन फुटबॉल लीग (DFL) की बैठक में DFB अध्यक्ष ने कहा कि इस समय बहिष्कार पर बहस करना ‘पूरी तरह गलत दिशा’ में है और जर्मन फुटबॉल तंत्र में इस मुद्दे पर व्यापक सहमति है कि अभी यह चर्चा उचित नहीं है।

DFL के अध्यक्ष ने भी संकेत दिया कि अभी ऐसे विषय पर चर्चा का समय नहीं आया है। बैठक में मौजूद क्लब स्तर के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने भी यह तर्क दिया कि भू-राजनीतिक मुद्दों को खेल के मंच पर किस तरह और कब संबोधित किया जाए, यह एक जटिल सवाल है। कुछ उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में भी कई देशों की मेजबानी के संदर्भ में विवाद रहे हैं, फिर भी टीमें टूर्नामेंट में शामिल हुईं।
हालांकि, बहिष्कार की मांगें बढ़ने की वजह भी सामने रखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की नीतियों और हाल की घटनाओं को लेकर जर्मनी और यूरोप में कुछ समूहों ने असंतोष जताया है। इसी बीच DFB के भीतर से भी कुछ अलग आवाजें सुनाई दीं। एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने व्यक्तिगत तौर पर मौजूदा स्थिति में यात्रा को लेकर आपत्ति जताई, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बहुमत का फैसला अंतिम होगा।
DFB नेतृत्व का कहना है कि बहिष्कार की बहस ‘अभी’ के लिए भटकी हुई है और पहले आंतरिक समितियों में चर्चा के बाद ही कोई साझा राय बननी चाहिए।
इस विवाद का एक व्यावहारिक पक्ष भी है: प्रशंसकों की यात्रा, सुरक्षा, वीज़ा/प्रवेश नियम, और आयोजन के दौरान माहौल। यदि यात्रा नियमों में बदलाव या सुरक्षा घटनाएं बढ़ती हैं तो प्रशंसक-स्तर पर बहिष्कार जैसी प्रवृत्तियां मजबूत हो सकती हैं, भले ही आधिकारिक टीमें भाग लें।
फिलहाल जर्मन फुटबॉल प्रशासन का संदेश यही है कि बहिष्कार की चर्चा इस समय प्राथमिकता नहीं है। आने वाले महीनों में यह बहस इस पर निर्भर करेगी कि राजनीतिक घटनाक्रम कैसे बदलते हैं, और यूरोप के भीतर खेल संगठनों तथा प्रशंसक समूहों का दबाव किस दिशा में जाता है। विश्व कप नजदीक आते ही यात्रा, सुरक्षा और राजनीतिक संकेतों को लेकर चर्चाएं तेज होने की संभावना बनी हुई है।