77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड, थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल; यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि
भारत ने 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाया। कर्तव्य पथ पर परेड की थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष रखी गई, जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन मौजूद रहे। झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में देश की विविधता, विकास और राष्ट्रप्रेम का संदेश केंद्र में रहा।
परेड का फोकस: राष्ट्रगान की भावना, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य अनुशासन
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन हुआ, जिसमें परंपरा, आधुनिकता और राष्ट्रीय संकल्प का मिश्रण दिखा। कार्यक्रम का केंद्र बिंदु इस बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल की थीम रही, जिसे झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनभागीदारी अभियानों में भी प्रमुखता से रखा गया।

परेड को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं की चर्चा भी बनी रही, क्योंकि यह आयोजन बड़े जनसमूह और विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होता है। परेड में देश की सैन्य क्षमता, अनुशासन और परंपराओं का प्रदर्शन होता है, जबकि झांकियां राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, हस्तशिल्प और विकास-योजनाओं की झलक पेश करती हैं।
मुख्य अतिथि और अंतरराष्ट्रीय संदेश
इस वर्ष परेड के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन के शामिल होने की जानकारी दी गई। ऐसे आयोजनों में मुख्य अतिथि की मौजूदगी को भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और रणनीतिक साझेदारियों के संकेतक के रूप में भी देखा जाता है।
कुल मिलाकर 77वें गणतंत्र दिवस का संदेश यही रहा कि संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता की भावना केवल प्रतीकात्मक आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के नागरिक जीवन और संस्थागत कामकाज में भी उतनी ही जरूरी है। इसी सोच के साथ परेड ने राष्ट्र की उपलब्धियों और आकांक्षाओं—दोनों को एक मंच पर रखा।