डावोस में भारत का ‘ग्रीन एनर्जी’ ऑफर: WEF 2026 में 300 अरब डॉलर तक निवेश का प्रस्ताव
WEF 2026 के दौरान भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन ट्रांजिशन में निवेश का बड़ा संदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने 2030 तक 500 GW लक्ष्य और स्थिर नीति-परिदृश्य के आधार पर वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश की।
स्विट्जरलैंड के डावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में भारत ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर को लेकर निवेशकों के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में 300 अरब डॉलर तक के निवेश अवसर पेश कर रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट (GW) रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को दोहराया और यह संदेश दिया कि निवेश के लिए बाजार स्थिर, भरोसेमंद और दीर्घकालिक संभावनाओं वाला है। सरकार की ओर से यह भी जोर दिया गया कि ऊर्जा परिवर्तन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा, रोजगार और आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा से भी जुड़ा है।
WEF जैसे मंच पर इस तरह के प्रस्ताव का उद्देश्य वैश्विक पूंजी को सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और संबंधित विनिर्माण इकोसिस्टम की ओर खींचना माना जा रहा है। रिपोर्ट के संदर्भ में यह भी संकेत मिलता है कि भारत निवेशकों को नीति निरंतरता और बड़े घरेलू मांग आधार का भरोसा देकर प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
हालांकि, ग्रीन एनर्जी निवेश के साथ चुनौतियां भी जुड़ी रहती हैं—जैसे भूमि अधिग्रहण, ग्रिड एकीकरण, वित्तपोषण की लागत, और आयात निर्भरता। लेकिन सरकार का तर्क है कि बड़े लक्ष्यों, घरेलू उत्पादन पर जोर और चरणबद्ध विस्तार से ये बाधाएं कम की जा सकती हैं।
रिपोर्ट का निष्कर्ष यह दर्शाता है कि डावोस में भारत का फोकस ‘क्लीन एनर्जी’ को आर्थिक विकास रणनीति के केंद्र में रखने पर है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि इस प्रस्ताव के बाद कितने ठोस निवेश समझौते, परियोजना घोषणाएं और साझेदारियां सामने आती हैं।