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चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर के करीब क्यों पहुंचे: सप्लाई घट रही, टेक और स्वच्छ ऊर्जा बढ़ा रही मांग

चांदी की कीमतों में तेज उछाल के पीछे कमजोर डॉलर और निवेश मांग के साथ-साथ उद्योगों की बढ़ती जरूरत भी एक बड़ी वजह है। सोलर, ईवी और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल बढ़ा है, जबकि खनन उत्पादन कई जगहों पर दबाव में है।

चांदी की कीमतों में हाल के महीनों में लगातार तेज बढ़ोतरी देखी गई है और कई बाजारों में यह ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब पहुंच गई। निवेशकों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि चांदी, जिसे अक्सर ‘सोने की तुलना में कम अहम’ माना जाता था, अब फिर से इतनी महत्वपूर्ण क्यों बन गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस उछाल के पीछे केवल निवेश भावना नहीं, बल्कि वास्तविक औद्योगिक मांग और सप्लाई का संकट भी शामिल है।

चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर के करीब क्यों पहुंचे: सप्लाई घट रही, टेक और स्वच्छ ऊर्जा बढ़ा रही मांग
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कीमतों को सहारा देने वाले कारणों में डॉलर की कमजोरी और ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद जैसे कारक भी गिने जा रहे हैं। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो कीमती धातुओं की ओर ‘सेफ हेवन’ के तौर पर रुझान मजबूत होता है। लेकिन इस बार चांदी के साथ एक खास बात यह है कि इसके उपयोग का दायरा तेजी से तकनीक और उद्योगों में बढ़ रहा है, जिससे मांग का आधार ज्यादा व्यापक हो गया है।

सप्लाई पक्ष पर दबाव बढ़ रहा है। दुनिया की बड़ी मात्रा में चांदी का उत्पादन करने वाले कई लैटिन अमेरिकी क्षेत्रों में खदानें पुरानी हो रही हैं और अयस्क की गुणवत्ता घट रही है। इससे उत्पादन महंगा होता जा रहा है और नई खदानों में निवेश की गति अपेक्षाकृत धीमी बताई जाती है। जब सप्लाई बढ़ नहीं पाती और मांग तेजी से बढ़ती है, तो कीमतों में उछाल स्वाभाविक होता है।

औद्योगिक मांग का सबसे बड़ा इंजन स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स हैं। सोलर पैनलों में विद्युत संचालन के लिए चांदी आधारित सामग्री का उपयोग अहम है। इलेक्ट्रिक वाहनों में वायरिंग, बैटरी सिस्टम और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी चांदी की जरूरत पारंपरिक कारों के मुकाबले अधिक होती है। इसके अलावा डेटा सेंटर और उन्नत कंप्यूटिंग में उच्च प्रदर्शन और थर्मल प्रबंधन के लिए भी चांदी का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि चांदी की कहानी अब सिर्फ गहनों या निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि ऊर्जा परिवर्तन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ गहराई से जुड़ गई है।

भविष्य को लेकर अनुमान मिश्रित हैं। कुछ निवेशकों को निकट अवधि में मुनाफावसूली से कीमतों में हल्की गिरावट की आशंका है, लेकिन दीर्घकालिक रुझान में उद्योगों की मांग को प्रमुख कारक माना जा रहा है। यदि सोलर और ईवी विस्तार योजनाएं तेज रफ्तार से आगे बढ़ती हैं और सप्लाई पक्ष उसी गति से नहीं बढ़ता, तो चांदी पर दबाव बना रह सकता है।

यही वजह है कि बाजार में चांदी को ‘सिर्फ कीमती धातु’ नहीं, बल्कि एक रणनीतिक औद्योगिक इनपुट के रूप में भी देखा जा रहा है। इस बदलाव ने चांदी के मूल्य निर्धारण में नई परत जोड़ दी है, जहां वित्तीय बाजार की भावना के साथ-साथ खनन, ऊर्जा नीति और तकनीकी विस्तार भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

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स्रोत

  1. DWDW