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संयुक्त राष्ट्र का अनुमान: 2025 में भारत की वृद्धि 7.4%, 2026 में 6.6%; अमेरिकी टैरिफ जोखिमों पर नजर

लाइवमिंट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में 7.4% बढ़ी मानी जा रही है और 2026 में 6.6% विस्तार का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार घरेलू मांग और सार्वजनिक निवेश ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के असर को काफी हद तक संतुलित कर सकते हैं।

यूएन रिपोर्ट में भारत के लिए क्या कहा गया

लाइवमिंट की 9 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के ‘World Economic Situation and Prospects 2026’ आकलन में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था का 2025 में 7.4% बढ़ना अनुमानित है, जबकि 2026 में 6.6% वृद्धि का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मजबूत घरेलू उपभोग और सार्वजनिक निवेश ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के संभावित नकारात्मक असर को काफी हद तक संभाल सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान: 2025 में भारत की वृद्धि 7.4%, 2026 में 6.6%; अमेरिकी टैरिफ जोखिमों पर नजर
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यह अनुमान ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक व्यापार वातावरण में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और कई बड़े बाजारों में मांग की गति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के ये अनुमान नीति-निर्माताओं और निवेशकों—दोनों की धारणा को प्रभावित करते हैं।

अमेरिकी टैरिफ और निर्यात पर संभावित प्रभाव

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंचे अमेरिकी टैरिफ चुनिंदा उत्पाद श्रेणियों पर असर डाल सकते हैं, लेकिन कुछ प्रमुख निर्यात खंड अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहने की संभावना है। साथ ही, अन्य बड़े बाजारों से मांग का सहारा भी आंशिक रूप से नकारात्मक प्रभाव को संतुलित कर सकता है।

हालांकि, आकलन में यह चेतावनी भी है कि पूर्व और दक्षिण एशिया के लिए जोखिम नीचे की ओर झुके हुए हैं। यदि अमेरिका, यूरोपीय संघ या चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती आती है तो क्षेत्रीय व्यापार, निवेश प्रवाह और पर्यटन गतिविधि पर दबाव बढ़ सकता है।

घरेलू मांग और सार्वजनिक निवेश का रोल

यूएन के आकलन के अनुसार भारत के लिए लचीलापन दिखाने वाला सबसे बड़ा कारक घरेलू खपत और सार्वजनिक निवेश है। बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च, पूंजीगत परियोजनाएं और मांग-समर्थक नीतियां अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं, खासकर तब जब वैश्विक मांग अनिश्चित हो।

यदि मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहे और वित्तीय स्थितियां स्थिर बनी रहें तो उपभोग-आधारित वृद्धि को मजबूती मिल सकती है। इसके साथ ही निजी निवेश की धारणा, रोजगार की गुणवत्ता और निर्यात प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्ष में मुख्य फोकस क्षेत्र रहेंगे।

क्यों मायने रखता है यह अनुमान

अंतरराष्ट्रीय अनुमानों का असर सरकारी बजट अनुमान, नीति प्राथमिकताओं और विदेशी निवेशकों की अपेक्षाओं पर पड़ता है। 2026 में 6.6% के अनुमान के साथ संदेश यह है कि भारत की वृद्धि टिकाऊ दिख रही है, लेकिन वैश्विक व्यापार नीति और बाहरी मांग से जुड़े जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

स्रोत

  1. MintMint